हर इन्सान भीतर से संजीदा होता है. पर भांति-भांति के मुखोटे लगाये बिना ज़िन्दगी की गाडी चलती नहीं. परन्तु जब आप सफल और आर्थिक रूप से सम्पन होते हैं तब पैसा आपको जस का तस उजागर होने की स्वतंत्रता देता है. इस दृष्टि से देखें तो धन के भी अध्यात्मिन पहलू हो सकते हैं. पर कलमाड़ी जैसे उन लोगों का क्या जिनकी संजीदगी तेल लेने गई है.
आम आदमी की दुविधा को समझा जा सकता है, लेकिन सबकुछ होने के बाद भी बेईमान बने रहना समझ से परे है.
आम आदमी की दुविधा को समझा जा सकता है, लेकिन सबकुछ होने के बाद भी बेईमान बने रहना समझ से परे है.
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