काश ग़ालिब ने सुनी होती शाहिर की ग़ज़ल
तो वो कहते मुकरर- मुकरर,
काश मजनू ने गाई होती शाहिर की ग़ज़ल,
तो शायद दुनिया वाले लैला को उससे न छिनते...
Abhijit Bhattacharya
--------------------------------------------------
10+2 हिंदी की पाठ्यपुस्तक में एक खुबसूरत गीत पढने को मिला...(शाहिर लुधियानवी )
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं है...
जिस इल्म ने इंसान को तक़सीम किया है,
उस इल्म का तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं है...
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया,
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया...
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें, एक ही धरती,
हमने कहीं भारत, कहीं ईरान बनाया...
जो तोड़ दे हर बंध, वो तूफान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
नफरत जो सिखाए, वो धरम तेरा नहीं है,
इंसां को जो रौंदे, वो कदम तेरा नहीं है...
कुरआन न हो जिसमें, वो मंदिर नहीं तेरा,
गीता न हो जिसमें, वो हरम तेरा नहीं है...
तू अम्न का और सुलह का अरमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
ये दीन के ताजिर, ये वतन बेचने वाले,
इंसानों की लाशों के कफन बेचने वाले...
ये महल में बैठे हुए कातिल ये लुटेरे,
कांटों के इवज रूह-ए-चमन बेचने वाले...
तू इनके लिए मौत का ऐलान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
फिल्म : धूल का फूल
गीतकार : साहिर लुधियानवी
संगीतकार : एन दत्ता
पार्श्वगायक : मोहम्मद रफी
फिल्म निर्देशक : यश चोपड़ा (यह इनकी निर्देशक के रूप में पहली फिल्म थी)
फिल्म निर्माता : बीआर चोपड़ा
--------------------------------------------------------------------
लड़कियां एवेरेस्ट की छोटी पर तिरंगा फहराती है,
और बस/ट्रेन में दूसरों से शीट की आशा भी रखती है ।
If a girl deserve seat on the merit of being a girl,then she deserve to be second class.
----------------------------------------------------------------------------------------------
ऐ खुदा...
-
-
-
-
-
-
-
-
तेरी माँ चुदा...
--------------------------------------------------------------------------------
इतनी शक्ति हमें देना दाता...
स्कूलों में सुबह-सुबह मोहताज़ बनाना सिखाया जाता है जबकि शिक्षा का उद्देश्य खुदगर्ज बनाना है।
अब इन्हें कौन बताये शक्ति दाता के पास नही, हमारे अंदर है।
-----------------------------------------------------------------------------------
एकमात्र लड़का जिससे वो मिलती है, वो है ऑटो ड्राईवर जो उसे स्कूल छोड़ने जाता है और एक दिन पता चलता है वो उस ड्राईवर के साथ भाग गई ।
जो पेरेंट्स अपनी लड़की पर बाहर जाने की, बोलने-बतियाने की बंदिशे लगते है, उन्हें ये नही पता वो अपनी लड़की में एक complex पैदा कर रहें है जो उनके मानसिक विकास को अवरुद्ध करता है ।—
feeling sad.
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
स्कूल में 3rd -4th क्लास से ही लड़के-लड़की को अलग-अलग डेस्क पर बैठना शुरू । लड़की को घर तक सीमित रखना, लड़कों से मिलने-जुलने नही देना:
ये बंदिशें लड़की और लड़कों में एक complex पैदा करती है, जिसके कारण उनके बीच कभी भी सहज-स्वभाविक रिश्ता और प्यार नही हो सकता । भारतीय समाज में लड़का-लड़की के बीच प्यार न तो आज तक कभी घटित हुआ है और न ही हो सकता है ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
मेरा छोटा सा सन्देश है !
आनंद से जियो !!
और जीवन के समस्त रंगों को जियो !
सारे स्वरों को जियो !!
कुछ भी निषेध नही करना है !
जो भी परमात्मा का है, शुभ है !!
जो भी उसने दिया है अर्थपूर्ण है !
-ओशो
तो वो कहते मुकरर- मुकरर,
काश मजनू ने गाई होती शाहिर की ग़ज़ल,
तो शायद दुनिया वाले लैला को उससे न छिनते...
Abhijit Bhattacharya
--------------------------------------------------
10+2 हिंदी की पाठ्यपुस्तक में एक खुबसूरत गीत पढने को मिला...(शाहिर लुधियानवी )
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं है...
जिस इल्म ने इंसान को तक़सीम किया है,
उस इल्म का तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं है...
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया,
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया...
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें, एक ही धरती,
हमने कहीं भारत, कहीं ईरान बनाया...
जो तोड़ दे हर बंध, वो तूफान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
नफरत जो सिखाए, वो धरम तेरा नहीं है,
इंसां को जो रौंदे, वो कदम तेरा नहीं है...
कुरआन न हो जिसमें, वो मंदिर नहीं तेरा,
गीता न हो जिसमें, वो हरम तेरा नहीं है...
तू अम्न का और सुलह का अरमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
ये दीन के ताजिर, ये वतन बेचने वाले,
इंसानों की लाशों के कफन बेचने वाले...
ये महल में बैठे हुए कातिल ये लुटेरे,
कांटों के इवज रूह-ए-चमन बेचने वाले...
तू इनके लिए मौत का ऐलान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा...
फिल्म : धूल का फूल
गीतकार : साहिर लुधियानवी
संगीतकार : एन दत्ता
पार्श्वगायक : मोहम्मद रफी
फिल्म निर्देशक : यश चोपड़ा (यह इनकी निर्देशक के रूप में पहली फिल्म थी)
फिल्म निर्माता : बीआर चोपड़ा
--------------------------------------------------------------------
लड़कियां एवेरेस्ट की छोटी पर तिरंगा फहराती है,
और बस/ट्रेन में दूसरों से शीट की आशा भी रखती है ।
If a girl deserve seat on the merit of being a girl,then she deserve to be second class.
----------------------------------------------------------------------------------------------
ऐ खुदा...
-
-
-
-
-
-
-
-
तेरी माँ चुदा...
--------------------------------------------------------------------------------
इतनी शक्ति हमें देना दाता...
स्कूलों में सुबह-सुबह मोहताज़ बनाना सिखाया जाता है जबकि शिक्षा का उद्देश्य खुदगर्ज बनाना है।
अब इन्हें कौन बताये शक्ति दाता के पास नही, हमारे अंदर है।
-----------------------------------------------------------------------------------
एकमात्र लड़का जिससे वो मिलती है, वो है ऑटो ड्राईवर जो उसे स्कूल छोड़ने जाता है और एक दिन पता चलता है वो उस ड्राईवर के साथ भाग गई ।
जो पेरेंट्स अपनी लड़की पर बाहर जाने की, बोलने-बतियाने की बंदिशे लगते है, उन्हें ये नही पता वो अपनी लड़की में एक complex पैदा कर रहें है जो उनके मानसिक विकास को अवरुद्ध करता है ।—
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
स्कूल में 3rd -4th क्लास से ही लड़के-लड़की को अलग-अलग डेस्क पर बैठना शुरू । लड़की को घर तक सीमित रखना, लड़कों से मिलने-जुलने नही देना:
ये बंदिशें लड़की और लड़कों में एक complex पैदा करती है, जिसके कारण उनके बीच कभी भी सहज-स्वभाविक रिश्ता और प्यार नही हो सकता । भारतीय समाज में लड़का-लड़की के बीच प्यार न तो आज तक कभी घटित हुआ है और न ही हो सकता है ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
मेरा छोटा सा सन्देश है !
आनंद से जियो !!
और जीवन के समस्त रंगों को जियो !
सारे स्वरों को जियो !!
कुछ भी निषेध नही करना है !
जो भी परमात्मा का है, शुभ है !!
जो भी उसने दिया है अर्थपूर्ण है !
-ओशो