जिस प्रकार ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले ये परखा जाता है कि क्या प्रार्थी की ड्राइविंग दूसरों के लिए जानलेवा तो नही होगी, क्या वो इसके लिए सक्षम है ।
इसी प्रकार बच्चे पैदा करने का लाइसेंस तभी दिया जाना चाहिए जब ये तय हो जाये कि प्रार्थी ये जिम्मेदारी उठाने में सक्षम है । जब हर जिम्मेदारी की योग्यता तय है तो इसकी क्यों नही । आखिर बच्चे पैदा करना भी तो एक बड़ी जिम्मेदारी है |
कुछ लोग सोचते हैं ये प्राकृतिक अधिकार है । प्राकृतिक अधिकार तो नंगे रहना भी है । प्रकृति तो इन्सान को अपनी माँ के साथ सेक्स करने से भी नही रोकती ।
इस समाज को सुविधाजनक रूप से चलने के लिए नियम कानून बनाये जाते है ।
नियम कानून social interest के लिए बनाये जाते हैं जिसमे individual interest की हानि होती है । यदि किसी individual interest से social interest की क्षति होती होती है तो social interest को तवज्जो देते हुए ऐसे individual interest को निषेध किया जाता है । बच्चे पैदा करना एक individual interest है और इससे social interest की क्षति (special case में ) किस प्रकार होती है कुछ उदाहरण :-
1.केला खाकर छिलका पडोसी के घर के सामने फेंकना। ये हमारे संस्कार हैं और असुविधा पडोसी को और सभी राहगीरों को |
2. मार्किट में अतिक्रमण से बचते हुए, रोड पर चलते हुए, किसी गाड़ी से दुर्घटना होने पर सजा -गाड़ी वाले को और राहगीर को । और गलती- अतिक्रमण करने वाले के पेरेंट्स की जो अपने बच्चों को इस लायक नही बना सके कि वो लीगल रूप से काम करके अपना पेट ही पाल सके | कारण– पेरंट्स खुद ही इतने सक्षम नही थे | तो फिर वही बात जब सक्षम नही थे तो बच्चे क्यों पैदा किये ?.गलती किसी की सजा किसी को |
3.उन बच्चों का क्या दोष है जो इतनी ठण्ड में नंगे बदन रेलवे स्टेशन पर सोते है | क्या ये जीवन उनके लिए सजा नही है? ये सजा किसने दी ?
4.ये धरती सिर्फ इंसानों की नहीं है । सभी जीवों का इसपर बराबर हक़ है । आवारा जानवरों के चरने के लिए जो समलात भूमि निर्धारित है उस पर भी इंसानों ने अतिक्रमण कर रखा है । उन बेजुबान पशुवों का क्या दोष जो अपनी भूख मिटने के लिए किसी खेत में घुस जाते है और खेत का मालिक उनकी गांड में मिर्ची दाल देता है |
उदारहण बहुत हैं जिसमे इन्सान की वक्तिगत मज़बूरी, रूचि, अक्षमता, अज्ञानता दूसरों के लिए जानलेवा साबित होती है |
मज़बूरी का कारण है अपना वंश चलने की परंपरा | दूसरों का वंश जाये भाड़ में |
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