Monday, 31 December 2012

मदिरों की भीड़ और पुस्तकालयों का सूनापन


आजकल सभी लेखकों के पास लिखने के लिए एक ही बात है " हमें खुद में बदलाव करना चाहिए और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना की जानी चाहिए" ।

खुद में बदलाव होता है नजरिया बदलने से और नजरिया बदलता है अच्छे विचारों से और अच्छे विचार किताबों में कैद है ।

नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए पढने की आदत विकसित की जानी चाहिए । और सभी मंदिरों को पुस्तकालयों में बदल देना चाहिए ।

और सभी देवताओं को, g##nd  में राकेट और मिशाइलें डालकर अंतरिक्ष में दाग देना चाहिए   । मिशाइलों का भी सदुपयोग हो जायेगा और मंदिरों का भी ।

मदिरों की भीड़ और पुस्तकालयों का सूनापन ही हमारी सबसे बड़ी समस्या है ।

Friday, 28 December 2012

एक लड़की के सबसे बड़े दुश्मन उसके पेरेंट्स होते हैं...



कल्पना चावला की उड़ान चाँद के पार पहुंची । क्या ये पुरुष प्रधान समाज उसकी उड़ान को रोक सका ? नहीं ।
क्योंकि चावला के पेरेंट्स ने उसको सपोर्ट किया और उसके पंख नही काटे । इसका मतलब ये है की यदि लड़की और उसके माता-पिता चाहे कि उनकी लड़की आगे बढे तो किसी समाज में इतना दम नही है कि वो एक लड़की को आगे बढ़ने से रोक सके ।

तो फिर लड़कियों के पिछड़ेपन के लिए दोष पुरे समाज को क्यों ? समाज का तो काम ही टांग खींचना है फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की। आखिर अपने बच्चों की सही परवरिश और उनको आगे बढाने की जिम्मेवारी पेरेंट्स की ही तो है ।
परन्तु इसके विपरीत लड़कियों के पांवों में बेड़ियाँ डालने वाले पहले शख्स लड़की के पेरेंट्स ही होते हैं, और इसके लिए उनके पास सिर्फ एक ही तर्क होता है - लोग क्या कहेंगे ???

अगर कल्पना के पेरेंट्स ने सोचा होता कि स्पेस यान में सिर्फ मलंग ही मलंग(पुरुष) हैं और हमारी लड़की अकेली इतने मलंगों के साथ चाँद पर जाएगी तो लोग क्या कहेंगे???, तो कल्पना चावला भी आज 80% पतिव्रता भारतीय नारियों की तरह गोबर के उपले और बितोड़े बना रही होती ।

एक लड़की के सबसे बड़े दुश्मन उसके पेरेंट्स होते हैं क्योंकि यही वो लोग हैं जो उसको कैद करके रखते हैं । और इस कैद से बाहर आने का रास्ता शोएब मंसूर की मूवी "बोल" में कैद है ।


Saturday, 8 December 2012

India is great! Really...

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है क्योंकि लोगों का तंत्र जब चाहे किताब, फिल्म और यहाँ तक कि हर अप्रिय लगने वाली सच्चाई को बैन कर सकता है |
भारत पूरी धरती को परिवार समझता है क्योंकि यहाँ जाती, धर्म, गोत्र की दीवारें सबसे ऊँची है और इन दीवारों को फांदने कि सजा यहाँ के संसकृति के ठेकेदारों के संविधान के अनुसार मोत है | यहाँ की सांसकृतिक विरासत बहुत विशाल है क्योंकि इसे पाश्चात्य संस्कृति से डर लगता है कहीं वो इस विरासत का पोस्टमार्टम न कर दे | इस अध्यात्मिक और धार्मिक देश में संस्कृतियों के बीच भी युद्ध होते है | गोयाकि संस्कृतियाँ हमलावर होती है(हालाँकि संस्कृतियाँ हमलावर नहीं तरल होती है, जो एक दुसरे में मिल जाती हैं और मिलकर और भी समृद्ध हो जाती है) | भारतीय संस्कृति को इन हमलों से हारने का भय है क्योंकि इसकी संस्कृति की जड़े बहुत गहरी हैं |
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है क्योंकि यहाँ सबसे ज्यादा हिंसा धर्म के नाम पर ही हुई है(हालाँकि हर धर्म का उद्देश्य शान्ति कायम करना है)| 
ये सब बातें फ़िल्मी लगती है और फिल्मे वास्तविक लगती है | बॉलीवुड को छोड़कर पूरा भारत ही एक फिल्म लगता है |