Monday, 31 December 2012

मदिरों की भीड़ और पुस्तकालयों का सूनापन


आजकल सभी लेखकों के पास लिखने के लिए एक ही बात है " हमें खुद में बदलाव करना चाहिए और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना की जानी चाहिए" ।

खुद में बदलाव होता है नजरिया बदलने से और नजरिया बदलता है अच्छे विचारों से और अच्छे विचार किताबों में कैद है ।

नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए पढने की आदत विकसित की जानी चाहिए । और सभी मंदिरों को पुस्तकालयों में बदल देना चाहिए ।

और सभी देवताओं को, g##nd  में राकेट और मिशाइलें डालकर अंतरिक्ष में दाग देना चाहिए   । मिशाइलों का भी सदुपयोग हो जायेगा और मंदिरों का भी ।

मदिरों की भीड़ और पुस्तकालयों का सूनापन ही हमारी सबसे बड़ी समस्या है ।

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