Friday, 2 August 2013

भारत का व्यवधान:- उद्देशिका

स्कूल में पढ़ाने के लिए जब भी किताब खोलता हूँ तो सबसे पहले संविधान की उद्देशिका सामने होती है जो मेरे हिसाब से इस प्रकार होनी चाहिए

 " हम भारत के मिडिल क्लास लोग , भारत को एक सम्पूर्ण चूतियों से सम्पन्न, पुरुषवादी, हिन्दुसापेक्ष, खापतंत्रात्मक लंडराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त पुरुष नागरिकों को :
           
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, सेक्स, गालिगलोच, शक, बलात्कार और छेड़छाड़ की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा
             
उन सबमें महिलायों की गरिमा को चोदने और पित्रसत्ता की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए, हम सब आट्टा चोदने की मशीन रूपी भारतीय, अपने दिमाग को गांड में रखते हुए,
               
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतद द्वारा इस व्यवधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"

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