Sunday, 17 July 2011

A Letter From God to Bloody Indian

मैं भगवान हूँ !
भारतियों से परेशान हूँ !!
साले खुद कुछ कर नहीं सकते मेरी गांड में डंडा रखते हैं मेरा ये काम कर दो मेरा वो काम कर दो|
रिश्वतखोर मुझे भी रिश्वत देकर (प्रसाद, दान आदि) पटाना चाहते हैं|

बहरहाल मैं कोई ऐसी सुपर पावर नहीं हूँ की तुम 10  रूपये का प्रसाद मंदिर में चढाओगे और मैं तुम्हारे सभी काम कर दूंगा|

न तो तुम्हारा प्रसाद मेरे पास पहुंचता है और न ही दान किये हुआ पैसे |
मेरे पास पहुँचती है तुम्हारी नियत जो की इतनी सड़ी हुई है कि दुनिया भर का सेंट भी इसकी सड़ांध को कम नही कर सकता |

इन्सान खुद भी जाती, धर्म, स्थान की सीमायों में बंटा हुआ है और और मुझे भी मंदिर मस्जिदों में बंद कर दिया | और फिर कहता है ये तेरा भगवान ये मेरा भगवान | मेरा भगवान ज्यादा शक्तिशाली, ज्यादा निराकार; तेरा भगवान कुछ भी नहीं | हमारा भी competition करा दिया |

फिर भी कुछ लोगों की नियत अच्छी है |जैसे म.फ. हुसैन जिसने मेरी नंगी पेंटिंग्स बनायीं थी जो मुझे बहुत पसंद आई क्योंकि मैं हमेशा नंगा ही रहता हूँ | कपड़ों का अविष्कार इन्सान ने किया है और मैं इन्सान द्वारा बनाये कपड़ों का मोहताज नहीं हूँ | कपड़ें न पहनना इन्सान के लिए अनैतिक हो सकता है मेरे लिए नहीं | पर इन्सान भी कितना दबंग है मुझ पर भी अपनी नैतिकता थोंपना चाहता है|

इन्सान अपने आप में एक बहुत बड़ा अजूबा है और वह अजूबों की खोज में पता नहीं कहाँ-कहाँ भटकता है | ठीक वैसे ही जैसे मेरी खोज में |

कुछ ज्यादा पढ़े-लिखे लोग कहते है मैं इस जग के कण-कण में विद्यमान हूँ | यदि ऐसा है तो मैं तुम्हारी टट्टी में भी हूँ फिर तुम अपनी टट्टी की पूजा क्यों नहीं करते ? सब की अपनी-अपनी अटकलें है|

खेर अभी चलता हूँ | 121 करोड़ अप्लिकेसन मेरी गांड में 121 डंडों की तरह लटक रही हैं | इन डंडों को निकालते-निकालते परेशान हो गया हूँ |

सभी भारतियों से निवेदन है अपने 3 पौंड के दिमाग का मोलिक उपयोग कीजिये, एन्जॉय कीजिये और मुझे भी करने दीजिये !!!
- God

No comments:

Post a Comment

place your comments here...

Note: only a member of this blog may post a comment.