Wednesday, 23 March 2011

हर मुस्कराहट चैक की तरह होती है, जवानी उम्र की बसंत बहार होती है, चतुर लकड़ियाँ उम्र की मेहरबानियों को भविष्य निधि में बदलना जानती हैं और ऐसी साधवानी नहीं बरतने पर एक वक़्त आता है जब उम्र के बैंक में जावानी का खाता कमजोर होने लगता है, मुस्कराहटों के चैक बाउंस होने लगते और जिंदगी धारा 138 का केस बनकर अदालत जा पहुंचती हैं.

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